बिहार के प्रमुख नदी घाटों, विशेषकर गंगा और महानंदा नदी के तटीय क्षेत्रों में पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा इंतजाम कड़े कर दिए हैं। जिला प्रशासन और नदी पुलिस के संयुक्त निर्देश के अनुसार अब नौका विहार करने वाले सभी नाविकों के लिए लाइफ जैकेट पहनना अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही बिना प्रशासनिक अनुमति के किसी भी नाव को घाट से संचालित नहीं किया जा सकेगा। यह कदम हाल के दिनों में बढ़ते पर्यटन और नदी दुर्घटनाओं की रोकथाम के मद्देनजर उठाया गया है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार गंगा और महानंदा के प्रमुख घाटों पर नाविकों की सूची तैयार की जा रही है, जिसमें उनके लाइसेंस, नावों की क्षमता और सुरक्षा उपकरणों का विवरण दर्ज किया जा रहा है। सभी नावों पर लाइफ जैकेट, बचाव रस्सी और प्राथमिक चिकित्सा किट अनिवार्य किए गए हैं। नदी पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमें घाटों पर लगातार निगरानी रख रही हैं और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
स्थानीय प्रशासन ने पर्यटकों से भी अपील की है कि वे केवल प्रशासनिक अनुमति प्राप्त नावों का ही उपयोग करें और नाविक द्वारा लाइफ जैकेट उपलब्ध कराए जाने पर ही नौका विहार करें। घाटों पर जागरूकता पोस्टर और बैनर लगाए जा रहे हैं, जिनमें सुरक्षा नियमों की जानकारी दी जा रही है। प्रशासन का मानना है कि इससे न केवल दुर्घटनाओं में कमी आएगी, बल्कि पर्यटकों का विश्वास भी बढ़ेगा।
गंगा और महानंदा नदियों के तटीय इलाके पर्यटकों के बीच लोकप्रिय हैं, लेकिन तेज जलधारा और अप्रशिक्षित नाविकों के कारण यहां दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। पिछले कुछ वर्षों में कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें जान-माल का नुकसान हुआ है। इसी को देखते हुए यह सख्ती बरती जा रही है। प्रशासन ने नाविकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरू करने की योजना बनाई है, ताकि आपात स्थिति में वे सही तरीके से कार्रवाई कर सकें।
व्यापारियों और स्थानीय निवासियों ने इस कदम का स्वागत किया है, लेकिन कुछ नाविकों ने अनुमति प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग की है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि अनुमति प्रक्रिया पारदर्शी और सुगम होगी, ताकि आम नाविकों को असुविधा न हो। आने वाले दिनों में घाटों पर सीसीटीवी कैमरे और रेस्क्यू टीमों की तैनाती भी की जाएगी। इस पहल से नदी पर्यटन को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने की उम्मीद है।